एंडोस्कोपी कब की जाती है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 09:49

कब पड़ती है मरीज को एंडोस्कोपी टेस्ट की जरूरत? जानें इस जांच के बारे में सबकुछ

बहुत बार ऐसा होता है जब मरीज किसी समस्या से जूझ रहा होता है और लंबे इलाज और दवा के सेवन के बाद भी उसे आराम नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एंडोस्कोपी टेस्ट का सहारा लेते हैं। लेकिन एंडोस्कोपी टेस्ट होता क्या है? एंडोस्कोपी को आप यूं समझ सकते हैं कि यह एक ऐसी मशीन होती है जो पतली नली जैसी दिखती है और इसके आगे एक छोटा सा कैमरा लगा होता है। डॉक्टर इसे मरीज के मुंह के माध्यम ये गले में डालते हैं और शरीर में क्या समस्या है ये देख पाते हैं।

यानि कि एंडोस्कोपी एक ऐसा मेडिकल प्रोसेस है जिसमें डॉक्टर एक मशीन की मदद से किसी व्यक्ति के शरीर में क्या चल रहा है ये देखने में समर्थ होते हैं। यह एक बहुत ही जटिल और गंभीर स्थिति होती है। हालांकि इसे करने में ज्यादा समय नहीं लगता है। एंडोस्कोपी टेस्ट- एसोफेगस, गले, हार्ट, पेट, कोलन, कान, ज्वॉइंट्स, नाक, दिल, यूरिनरी ट्रेक्ट और एब्डोमन में किया जा सकता है। अब आपके दिमाग में यकीनन यह सवाल गोते खा रहा होगा कि आखिर यह टेस्ट क्यों जरूरी और किस व्यक्ति और बीमारी में कराने की जरूरत पड़ती है? यह जानने के लिए आपको ये लेख पढ़ने की जरूरत है। तो आइए विस्तार से जानते हैं एंडोस्कोपी के बारे में-
किन लोगों को पड़ती है इसकी जरूरत?

एंडोस्कोपी टेस्ट मेडिकल क्षेत्र में बहुत ही एडवांस तकनीक मानी जाती है। यह इतनी एडवांस है कि मुंह से पेट के रास्ते जाने के दौरान ही यह रोग के बारे में बताने लगती है। यानि कि जब डॉक्टर्स इसे प्रयोग करते हैं तो इसके रिजल्ट के लिए किसी रिपोर्ट के आने का इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि मरीज के शरीर में क्या चल रहा है वह साथ-साथ मॉनिटर पर दिखता है। क्योंकि यह बहुत ही एडवांस और महंगी तकनीक है इसलिए इसे कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं में ही इस्तेमाल किया जाता है। नीचे हम आपको वो स्थिति बता रहे हैं जब इसकी जरूरत पड़ती है।

1. जब उल्टी के साथ मुंह से खून आए

2. साइनस की स्थिति में

3. ग्रास नली की समस्या होने पर

4. एसोफेगस में दर्द या जलन होने पर

5. पेट में तेज दर्द और जलन होने पर

6. गले और छाती में छाले होने पर

7. आंतों में तेज दर्द की स्थिति में

8. भयंकर कब्ज में

9. मल के साथ खून आने पर

11. गर्भाश्य की जांच में

12. गर्भावस्था में भूर्ण जांच

13. गम्भीर सर्जरी से पहले

14. कान के पर्दे के रोगों में
कैसे होती है एंडोस्कोपी की प्रकिया?

यह बहुत ही सेंसटिव टेस्ट होता है इसलिए इसे किसी एक्सपर्ट, विशिष्ट और स्पेशलिस्ट डॉक्टर से ही कराना चाहिए। डॉक्टर एंडोस्कोपी नली को मुंह में इस तरह से डालते हैं ताकि अन्य अंगों को नुकसान न पहुंचे और रगड़ न लगे। आमतौर पर एंडोस्कोपी करने में 45 मिनट से एक घंटे का समय लग सकता है लेकिन अगर ऑपरेशन की नौबत आती है तो समय बढ़कर 2 घंटे भी लग सकते हैं। इस दौरान मरीज में मुंह का लाल होना, हाथ पैर फड़फड़ना, आंखें लाल होना या आंसू आना, जी घबराना और उल्टी आने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। हालांकि टेस्ट के दौरान डॉक्टर तो हाथों हाथ देख लेते हैं कि मरीज के शरीर में क्या दिक्कत है जबकि टेस्ट के तुरंत बाद रिपोर्ट के माध्यम से मरीज को भी डॉक्टर द्वारा समझाया जाता है।
क्या एंडोस्कोपी नुकसानदायक भी है?

अगर आप किसी स्पेशलिस्ट की निगरानी में एंडोस्कोपी टेस्ट करा रहे हैं तो आपको घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, यह पूरी तरह सुरक्षित होता है। हालांकि जांच के दौरान मरीज को सामान्य उल्टी, गले और मुंह में दर्द और चक्कर आना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, इसके लिए डॉक्टर दवा या लिक्विड देते हैं, जिससे कुछ देर में ही आराम मिल जाता है। एंडोस्कोपी की जांच के बाद 1-2 दिन तक आराम करने की सलाह दी जाती है। इस लिहाज से हम समझ सकते हैं कि एंडोस्कोपी टेस्ट 99% सुरक्षित होता है।

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